audio audioduration (s) 0.14 15.9 | sentence stringlengths 2 117 |
|---|---|
उसके चेहरे पर चेचक के दाग थे | |
दादाजी अचानक चिल्ला उठे दुश्मन फिर आ गए | |
कितनी न्यायपरायण हो जाती है | |
हर कोई यही कह रहा था औरत हो तो सविताजी जैसी | |
बस दूसरों को आँखों से देखते हैं | |
मयूरी धीरे से दूसरे कमरे में गई और रोशनी की | |
लोग उसका मजाक उड़ाते रहे कोई कौवा बुलाता कोई उसे कलूटी बुलाता कोई तवा बुलाता | |
मांझी द माउंटेन मैंन को बच्चा बच्चा याद रखेगा केतन मेहता | |
पर दूसरे कारिंदों से बातें सुनसुन कर उसे शंका होती थी | |
लेकिन एकजुट देश का गांधी | |
केवल अनुमान और तर्क का भरोसा है | |
मीठी और गर्मागर्म बनाना दादाजी चिल्लाए | |
जब हम राह भूल कर भटकने लगते हैं | |
न ही कोई उसे अपने मन का काम करने से रोक सकता था | |
अमूल की सफलता को देखते हुए | |
यह सुनकर महाराज कृष्णदेव राय समझ गए कि | |
एक ने सीढ़ी खड़ी की | |
विरोध में दाँडी तक की यात्रा का नेतृत्व किया | |
नेतृत्व के संकट का सामना कर रहा है पाक मुशर्रफ | |
आठ नौ पंद्रह पैसे हैं | |
उत्कृष्ट कारीगरी के लिये विश्वभर में जाने जाते हैं | |
तो उसको छूने वाली हवा बहुत गर्म हो उठती है | |
तो उस में दस लाख से ज़्यादा | |
तीन साल हुए खालाजान ने अपनी जायदाद मेरे नाम हिब्बा कर दी थी | |
अब गांधी ने ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ़ एक नये | |
मोहन सिद्धेश्वरी का मंझला लड़का था | |
सामने शैलमाला की चोटी पर हरियाली में | |
अपने आप पर भरोसा रखें | |
हाथों अतल जल में विसर्जन कर दे | |
विश्राम करना पसंद करते हैं | |
दबेकुचले समुदायों को भी प्रशिक्षण दे रहा है | |
मैंने भी बचपन से परियों की कल्पना की थी | |
खंडहर पार कर गया | |
मगर जुमराती शेख स्वयं आशीर्वाद के कायल न थे | |
अकस्मात उन्होंने भानुकुँवरि के एक चपरासी को आते हुए देखा | |
शीशे का प्याला था खिड़की पर | |
फाइव | |
स़िर्फ वे लोग जायेंगे जिन्हें महात्मा जी ने खुद चुना है | |
और यदि वास्तव में कोई न्यायशक्ति हो और | |
अचानक किसी ने उनका दरवाज़ा खटखटाया | |
कारण अनेक प्रकार के प्राकृतिक दृश्यों को | |
महानाविक बुधगुप्त की आज्ञा सिंधु की लहरें मानती हैं | |
क्या लगता है तुम्हें बादल क्यों गरजते हैं | |
ना कहने का सुन लो मुहूर्त यही | |
अतिथिगृह भी काफी बड़ा | |
स्वदेस है तेरा | |
दूसरे बंदी ने हर्षातिरेक से उसको गले से लगा लिया | |
एक कोने में आग सुलग रही थी | |
वह दिल के अरमान निकाल लेगा | |
कोलंबिया विश्वविद्यालय की डॉक्टर केली हार्डिंग ने | |
हामिद का दिल बैठ गया | |
भानुकुँवरि इन बातों में दखल देना उचित न समझती थी | |
कैसा लगा दीदी ठीक कहा न मैंने | |
कौनसी तरकारियॉँ हैं | |
अंतिम बस अड्डा भी है | |
यह वाईन चखकर देखो तुम्हें अच्छी लगती है कि नहीं। | |
फाइव | |
कॉफी शॉप पर रिलीज होगा फिल्म शानदार का नया गाना | |
मैं नहीं चाहता इस शो में कोई भी कमी हो | |
बच्चों के लिए नगर की सभी चीज़ें अनोखी थीं | |
पर यह नहीं देख सकता कि उसके प्रमोद को कुछ हो जाए | |
बहुत अच्छा गाँधी जी ने हाथ हिलाकर कहा | |
पूछाक्यों चौधरी तुम्हें कोई उज्र तो नहीं | |
अतएव उन्होंने कई कोडे़ बड़ी निर्दयता से फटकारे | |
हम और तुम पुराने दोस्त हैं | |
चट्टानों के मध्य सागर का उथला भाग है | |
तुम इतना लम्बा नहीं चल पाओगे | |
बुधगुप्त के दोनों हाथ पकड़ लिए | |
एक छोटी सी नगरी है आमेर | |
निशा बचपन से ही अपने माँ रश्मि के कष्टों को देखती चली आ रही थी | |
अब बच्चे उससे नहीं डरते | |
हामिद के पैरों में तो जैसे पर लग गए हैं | |
आधे घंटे बाद डॉक्टर की कार आई | |
गांव की चौपाल पर शाम की बैठक जमी थी | |
जिस बात को सारी दुनिया जानती है | |
काला आकाश गर्म हवा और हरी घास पर टहलता मैं | |
उधर अलगू चौधरी ने समझानेबुझाने का काम अपने तर्कपूर्ण सोंटे से लिया | |
यह कहता हुआ वह आगे बढ़ गया कि | |
उम्मीद का दामन थामे रखने के कारण ही | |
आकाश में बड़ेबड़े काले बादल घिर आए हैं और | |
दादाजी ने मेरी बुद्धिमानी की प्रशंसा की | |
वह अपने खेतों में काम कर घर लौट रहा था | |
मुझे बारिश से भीगी मिट्टी की सौंधी महक बहुत अच्छी लगती है | |
एट | |
इजराइली पीएम नेतन्याहू विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मिले | |
आपने कभी भूल कर भी दी तो चर्चा नहीं की | |
वह जब भी आईने में खुद को देखती उसे पंख ही नजर आते | |
विश्व के सबसे उम्रदराज मैराथन धावक फौजा सिंह ने संन्यास लिया | |
बुधगुप्त आज मैं अपने प्रतिशोध का कृपाण | |
और जब मेरे पिता बरसों पर लौटते तो कहते | |
सभी उसकी अच्छाई करते है। | |
यह है हवा | |
यह रियायत करें तो उनकी भलमनसी | |
नवयुवक युवावस्था में कितना उद्दंड रहता है | |
एकदो क्षण बाद उसने सिर को किवाड़ से | |
बुधगुप्त वह दिन कितना सुंदर होता | |
सिद्धेश्वरी ने खाने की थाली सामने लाकर रख दी और | |
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोसिताँ हमारा | |
हिमाचलः पतंजलि योगपीठ का उद्घाटन नहीं कर पाएंगे बाबा रामदेव | |
पूछाक्यों चौधरी तुम्हें कोई उज्र तो नहीं |
End of preview. Expand
in Data Studio
README.md exists but content is empty.
- Downloads last month
- 50